| आना तुम
मेरे घर |
| अधरों पर
हास लिये |
| तन-मन की
धरती पर |
| झर-झर-झर-झर-झरना |
| साँसों
मे प्रश्नों का आकुल आकाश लिये |
|
| तुमको पथ
में कुछ मर्यादाएँ रोकेंगी |
| जानी-अनजानी
सौ बाधाएँ रोकेंगी |
| लेकिन
तुम चन्दन सी, सुरभित कस्तूरी
सी |
| पावस की
रिमझिम सी, मादक मजबूरी सी |
| सारी
बाधाएँ तज, बल खाती नदिया बन |
| मेरे तट
आना |
| एक भीगा
उल्लास लिये |
| आना तुम
मेरे घर |
| अधरों पर
हास लिये |
|
| जब तुम
आओगी तो घर आँगन नाचेगा |
| अनुबन्धित
तन होगा लेकिन मन नाचेगा |
| माँ के
आशीषों-सी, भाभी की बिंदिया-सी |
| बापू के
चरणों-सी, बहना की निंदिया-सी |
| कोमल-कोमल, श्यामल-श्यामल, अरूणिम-अरुणिम |
| पायल की
ध्वनियों में |
| गुंजित
मधुमास लिये |
| आना तुम
मेरे घर |
| अधरों पर
हास लिये |
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