पीर का संदेशा आया - कुमार विश्वास

 

 


 


पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री।
गीतों को दे मधुरिम स्वर अधरों से प्रीत लिखो री।

हर पल की आँधी को, आँचल में बांधे हो
आँसू की धारा को, पलकों में साधे हो
मुख पर पीलापन हो, तन का उजड़ा वन हो
सँध्या की बेला में, उन्मन-उन्मन मन हो
पीड़ा पहुँचाए जो, औषिध पीड़ा हर री!
तब भी मत आना तुम, ड्यौढ़ी से बाहर री।
रच लेना शब्द चार
आँसू रो-रोकर तुम संयम की रीत लिखो री!
पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री।

जब भी वो अलबेला गुजरे गलियारे से
दो चंचल नयना रोकें मतवारे से
तो अलबेला प्रीतम खींचे जो बाहों में
अधरों को अधरों पर रख दे जो आहों में
वो पल ना छिन जाये, गोरी शरमाना मत
जीकर उस पल को
तुम पूरी मर्यादा से यौवन की प्रीत लिखो री।
पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री।

 

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