| पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री। |
| गीतों को दे मधुरिम स्वर अधरों से प्रीत लिखो री। |
| हर पल की आँधी को, आँचल में बांधे हो |
| आँसू की धारा को, पलकों में साधे हो |
| मुख पर पीलापन हो, तन का उजड़ा वन हो |
| सँध्या की बेला में, उन्मन-उन्मन मन हो |
| पीड़ा पहुँचाए जो, औषिध पीड़ा हर री! |
| तब भी मत आना तुम, ड्यौढ़ी से बाहर री। |
| रच लेना शब्द चार |
| आँसू रो-रोकर तुम संयम की रीत लिखो री! |
| पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री। |
| जब भी वो अलबेला गुजरे गलियारे से |
| दो चंचल नयना रोकें मतवारे से |
| तो अलबेला प्रीतम खींचे जो बाहों में |
| अधरों को अधरों पर रख दे जो आहों में |
| वो पल ना छिन जाये, गोरी शरमाना मत |
| जीकर उस पल को |
| तुम पूरी मर्यादा से यौवन की प्रीत लिखो री। |
| पीर का संदेशा आया आँसू के गीत लिखो री। |
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