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Jaun Elia
Poetry List |
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शायद जौन एलिया |
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1. शायद |
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2. अजनबी शाम |
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3. तआ'क़ुब |
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4. बस एक अंदाज़ा |
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5. दरीचा-हा-ए-ख़याल |
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6. सज़ा |
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7. मगर ये ज़ख़्म ये मरहम |
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8. अब वो घर इक वीराना था बस
वीराना ज़िंदा था |
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9. आज लब-ए-गुहर-फ़िशाँ आप ने वा
नहीं किया |
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10. किसी से अहद-ओ-पैमाँ कर न
रहियो |
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11. क्या हुए आशुफ़्ता-काराँ क्या
हुए |
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12. गँवाई किस की तमन्ना में
ज़िंदगी मैंने |
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13. गाहे गाहे बस अब यही हो क्या |
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14. जाओ क़रार-ए-बे-दिलाँ
शाम-ब-ख़ैर शब-ब-ख़ैर |
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15. ज़िक्र-ए-गुल हो ख़ार की
बातें करें |
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16. तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ
ये कैसी तन्हाई है |
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17. नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ
करें हम |
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18. न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार भी अब नहीं |
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19. भटकता फिर रहा हूँ जुस्तुजू
बिन |
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20. हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ |
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21. हम रहे पर नहीं रहे आबाद |
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22. हू का आलम है यहाँ नाला-गरों
के होते |
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23. है फ़सीलें उठा रहा मुझ में |
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24. है बिखरने को ये
महफ़िल-ए-रंग-ओ-बू |
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25. शर्म दहशत झिझक परेशानी |
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26. है मोहब्बत हयात की लज़्ज़त |
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27. हर तंज़ किया जाए हर इक तअना
दिया जाए |
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28. जो हक़ीक़त है उस हक़ीक़त से |
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29. चाँद की पिघली हुई चाँदी में |
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30. मेरी अक़्ल-ओ-होश की सब
हालतें |
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31. मैंने हर बार तुझ से मिलते
वक़्त |
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32. जो रानाई निगाहों के लिए
फ़िरदौस-ए-जल्वा है |
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33. जो हक़ीक़त है उस हक़ीक़त से |
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34. इश्क़ समझे थे जिस को वो शायद |
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35. साल-हा-साल और इक लम्हा |
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36. पास रह कर जुदाई की तुझ से |
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37. ये तेरे ख़त तिरी ख़ुशबू ये
तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल |
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38. कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया
में |
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39. क्या बताऊँ कि सह रहा हूँ मैं |
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40. उसके और अपने दरमियान में अब |
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41. वो किसी दिन न आ सके पर उसे |
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42. मिरी जब भी नज़र पड़ती है तुझ
पर |
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43. सर में तकमील का था इक सौदा |
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44. पसीने से मिरे अब तो ये रूमाल |
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45. ये तो बढ़ती ही चली जाती है
मीआद-ए-सितम |
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46. थी जो वो इक तमसील-ए-माज़ी
आख़िरी मंज़र उसका ये था |
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गुमाँ जौन एलिया |
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1. अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद
रखें |
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2. अजब हालत हमारी हो गई है |
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3. अपनी मंज़िल का रास्ता भेजो |
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4. अब किसी से मिरा हिसाब नहीं |
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5. आदमी वक़्त पर गया होगा |
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6. आप अपना ग़ुबार थे हम तो |
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7. उसने हम को गुमान में रक्खा |
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8. एक गुमाँ का हाल है और फ़क़त
गुमाँ में है |
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9. एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है |
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10. ऐ कू-ए-यार तेरे ज़माने गुज़र
गए |
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11. ऐश-ए-उम्मीद ही से ख़तरा है |
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12. कब उस का विसाल चाहिए था |
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13. कभी कभी तो बहुत याद आने लगते
हो |
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14. काम की बात मैं ने की ही नहीं |
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15. किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे |
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16. किसी से कोई ख़फ़ा भी नहीं
रहा अब तो |
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17. कू-ए-जानाँ में और क्या माँगो |
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18. कौन से शौक़ किस हवस का नहीं |
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19. क्या यक़ीं और क्या गुमाँ चुप
रह |
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20. क्या ये आफ़त नहीं अज़ाब नहीं |
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21. ख़ुद मैं ही गुज़र के थक गया
हूँ |
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22. ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उन
के |
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23. ख़ून थूकेगी ज़िंदगी कब तक |
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24. ख़्वाब के रंग दिल-ओ-जाँ में
सजाए भी गए |
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25. ग़म है बे-माजरा कई दिन से |
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26. गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं |
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27. घर से हम घर तलक गए होंगे |
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28. चलो बाद-ए-बहारी जा रही है |
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29. जुज़ गुमाँ और था ही क्या
मेरा |
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30. ज़ख़्म-ए-उम्मीद भर गया कब का |
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31. ज़िक्र भी उस से क्या भला
मेरा |
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32. तंग आग़ोश में आबाद करूँगा
तुझ को |
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33. तिफ़्लान-ए-कूचा-गर्द के
पत्थर भी कुछ नहीं |
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34. तिश्नगी ने सराब ही लिक्खा |
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35. तुझ से गिले करूँ तुझे जानाँ
मनाऊँ मैं |
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36. तुम से भी अब तो जा चुका हूँ
मैं |
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37. तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर
इजाज़त हो |
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38. दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के
घर बरबाद हुए |
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39. दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते |
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40. दिल गुमाँ था गुमानियाँ थे हम |
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41. दिल जो इक जाए थी दुनिया हुई
आबाद उस में |
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42. दिल जो है आग लगा दूँ उस को |
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43. दिल ने वफ़ा के नाम पर
कार-ए-वफ़ा नहीं किया |
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44. दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू |
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45. न हम रहे न वो ख़्वाबों की
ज़िंदगी ही रही |
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46. नहीं निबाही ख़ुशी से ग़मी को
छोड़ दिया |
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47. फ़ुर्क़त में वसलत बरपा है
अल्लाह-हू के बाड़े में |
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48. बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं |
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49. बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र
जाएँगे |
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50. मुझ को तो गिर के मरना है |
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51. मैं न ठहरूँ न जान तू ठहरे |
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52. याद उसे इंतिहाई करते हैं |
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53. वो क्या कुछ न करने वाले थे |
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54. वो ख़याल-ए-मुहाल किस का था |
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55. वो जो था वो कभी मिला ही नहीं |
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56. शहर-ब-शहर कर सफ़र
ज़ाद-ए-सफ़र लिए बग़ैर |
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57. शाम तक मेरी बेकली है शराब |
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58. शाम थी और बर्ग-ओ-गुल शल थे
मगर सबा भी थी |
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59. सब चले जाओ मुझ में ताब नहीं |
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60. सर-ए-सहरा हबाब बेचे हैं |
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61. सीना दहक रहा हो तो क्या चुप
रहे कोई |
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62. हम तिरा हिज्र मनाने के लिए
निकले हैं |
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63. हर धड़कन हैजानी थी हर
ख़ामोशी तूफ़ानी थी |
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64. हवास में तो न थे फिर भी क्या
न कर आए |
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65. हिज्र की आँखों से आँखें तो
मिलाते जाइए |
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66. है अजब हाल ये ज़माने का |
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गोया जौन एलिया |
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1. इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं |
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2. इंक़लाब एक ख़्वाब है सो है |
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3. काम मुझ से कोई हुआ ही नहीं |
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4. गुफ़्तुगू जब मुहाल की होगी |
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5. जो गुज़र दुश्मन है उस का
रहगुज़र रक्खा है नाम |
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6. धूप उठाता हूँ कि अब सर पे कोई
बार नहीं |
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7. न कोई हिज्र न कोई विसाल है
शायद |
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8. नश्शा-ए-शौक़-ए-रंग में तुझ से
जुदाई की गई |
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9. बात कोई उमीद की मुझ से नहीं
कही गई |
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10. मस्कन-ए-माह-ओ-साल छोड़ गया |
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11. शाख़-ए-उम्मीद जल गई होगी |
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12. शौक़ का बार उतार आया हूँ |
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13. सारे रिश्ते तबाह कर आया |
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14. हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल
ही गई |
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लेकिन जौन एलिया |
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1. अभी इक शोर सा उठा है कहीं |
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2. आख़िरी बार आह कर ली है |
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3. इक साया मिरा मसीहा था |
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4. ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया |
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5. दिल परेशाँ है क्या किया जाए |
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6. न तो दिल का न जाँ का दफ़्तर
है |
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7. रूठा था तुझ से या'नी ख़ुद
अपनी ख़ुशी से मैं |
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8. लम्हे लम्हे की ना-रसाई है |
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यानी जौन एलिया |
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1. अपने सब यार काम कर रहे हैं |
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2. अभी फ़रमान आया है वहाँ से |
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3. कितने ऐश से रहते होंगे कितने
इतराते होंगे |
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4. ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं |
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5. बहुत दिल को कुशादा कर लिया
क्या |
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6. बंद बाहर से मिरी ज़ात का दर
है मुझ में |
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7. बे-क़रारी सी बे-क़रारी है |
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8. मुझे ग़रज़ है मिरी जान ग़ुल
मचाने से |
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9. ये जो सुना इक दिन वो हवेली
यकसर बे-आसार गिरी |
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10. रूह प्यासी कहाँ से आती है |
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11. शमशीर मेरी, मेरी सिपर किस के
पास है |
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12. शौक़ का रंग बुझ गया याद के
ज़ख़्म भर गए |
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13. सिलसिला जुम्बाँ इक तन्हा से
रूह किसी तन्हा की थी |
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14. हम आँधियों के बन में किसी
कारवाँ के थे |
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15. दरख़्त-ए-ज़र्द |
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16. सफ़र के वक़्त |
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17. ख़ल्वत |
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विविध ग़ज़लें जौन एलिया |
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1. अख़लाक़ न बरतेंगे मुदारा न
करेंगे |
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2. अपना ख़ाका लगता हूँ |
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3. अब जुनूँ कब किसी के बस में है |
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4. आगे असबे खूनी चादर और खूनी
परचम निकले |
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5. आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में |
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6. इक ज़ख़्म भी यारान-ए-बिस्मिल
नहीं आने का |
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7. ईज़ा-दही की दाद जो पाता रहा
हूँ मैं |
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8. उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में
क्या |
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9. उसके पहलू से लग के चलते हैं |
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10. ऐ वस्ल कुछ यहाँ न हुआ कुछ
नहीं हुआ |
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11. ऐ सुबह मैं अब कहाँ रहा हूँ |
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12. कभी जब मुद्दतों के बा'द उस
का सामना होगा |
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13. कोई दम भी मैं कब अंदर रहा
हूँ |
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14. कोई हालत नहीं ये हालत है |
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15. क्या कहें तुम से बूद-ओ-बाश
अपनी |
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16. क्या हो गया है गेसू-ए-ख़मदार
को तिरे |
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17. ख़ुद से हम इक नफ़स हिले भी
कहाँ |
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18. ख़ूब है शौक़ का ये पहलू भी |
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19. ख़्वाब की हालातों के साथ
तेरी हिकायतों में हैं |
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20. जाने कहाँ गया है वो वो जो
अभी यहाँ था |
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21. जॉन ! गुज़ाश्त-ए-वक्त की
हालत-ए-हाल पर सलाम |
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22. जी ही जी में वो जल रही होगी |
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23. जो ज़िंदगी बची है उसे मत
गंवाइये |
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24. जो हुआ 'जौन' वो हुआ भी नहीं |
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25. ज़िंदगी क्या है इक कहानी है |
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26. तुझ में पड़ा हुआ हूँ हरकत
नहीं है मुझ में |
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27. तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो |
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28. दिल-ए-बर्बाद को आबाद किया है
मैंने |
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29. दिल का दयार-ए-ख़्वाब में दूर
तलक गुज़र रहा |
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30. दिल की हर बात ध्यान में
गुज़री |
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31. दिल को दुनिया का है सफ़र
दरपेश |
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32. दिल ने किया है क़स्द-ए-सफ़र
घर समेट लो |
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33. दीद की एक आन में कार-ए-दवाम
हो गया |
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34. न पूछ उस की जो अपने अंदर
छुपा |
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35. नाम ही क्या निशाँ ही क्या
ख़्वाब-ओ-ख़याल हो गए |
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36. बज़्म से जब निगार उठता है |
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37. बजा इरशाद फ़रमाया गया है |
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38. बद-दिली में बे-क़रारी को
क़रार आया तो क्या |
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39. बाहर गुज़ार दी कभी अंदर भी
आएँगे |
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40. मसनद-ए-ग़म पे जच रहा हूँ मैं |
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41. महक उठा है आँगन इस ख़बर से |
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42. यह ग़म क्या दिल की आदत है?
नहीं तो |
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43. यादों का हिसाब रख रहा हूँ |
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44. ये अक्सर तल्ख़-कामी सी रही
क्या |
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45. ये पैहम तल्ख़-कामी सी रही
क्या |
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46. रंज है हालत-ए-सफ़र
हाल-ए-क़याम रंज है |
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47. लाज़िम है अपने आप की इमदाद
कुछ करूँ |
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48. शर्मिंदगी है हम को बहुत हम
मिले तुम्हें |
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49. शाम हुई है यार आए हैं यारों
के हमराह चलें |
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50. समझ में ज़िंदगी आए कहाँ से |
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51. सर ही अब फोड़िए नदामत में |
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52. सोचा है कि अब कार-ए-मसीहा न
करेंगे |
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53. हम जी रहे हैं कोई बहाना किए
बग़ैर |
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54. हम तो जैसे वहाँ के थे ही
नहीं |
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55. हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने
हो गए हैं |
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विविध नज़्में जौन एलिया |
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1. लौ-ए-दिल जला दूँ क्या |
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2. रम्ज़ |
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3. नाकारा |
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4. फ़न पारा |
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5. वो |
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6. हमेशा क़त्ल हो जाता हूँ मैं |
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7. रातें सच्ची हैं दिन झूटे हैं |
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8. क़ातिल |
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9. चारा-गर भी जो यूँ गुज़र जाएँ |
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10. तमन्ना कई थे |
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11. फ़ैसला |
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