उस ने हम को गुमान में रक्खा - जौन एलिया

 

 

 

 




उस ने हम को गुमान में रक्खा

और फिर कम ही ध्यान में रक्खा



क्या क़यामत-नुमू थी वो जिस ने

हश्र उस की उठान में रक्खा



जोशिश-ए-ख़ूँ ने अपने फ़न का हिसाब

एक चुप इक चटान में रक्खा



लम्हे लम्हे की अपनी थी इक शान

तू ने ही एक शान में रक्खा



हम ने पैहम क़ुबूल-ओ-रद कर के

उस को एक इम्तिहान में रक्खा



तुम तो उस याद की अमान में हो

उस को किस की अमान में रक्खा



अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो

कुछ नहीं आसमान में रक्खा


 

 

 

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