| आदमी वक़्त पर गया होगा | |
| वक़्त पहले गुज़र गया होगा | |
| वो हमारी तरफ़ न देख के भी | |
| कोई एहसान धर गया होगा | |
| ख़ुद से मायूस हो के बैठा हूँ | |
| आज हर शख़्स मर गया होगा | |
| शाम तेरे दयार में आख़िर | |
| कोई तो अपने घर गया होगा | |
| मरहम-ए-हिज्र था अजब इक्सीर | |
| अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा | |
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