हवास में तो न थे फिर भी क्या न कर आए - जौन एलिया

 

 





हवास में तो न थे फिर भी क्या न कर आए

कि दार पर गए हम और फिर उतर आए



अजीब हाल के मजनूँ थे जो ब-इश्वा-ओ-नाज़

ब-सू-ए-बाद ये महमिल में बैठ कर आए



कभी गए थे मियाँ जो ख़बर के सहरा की

वो आए भी तो बगूलों के साथ घर आए



कोई जुनूँ नहीं सौदाइयान-ए-सहरा को

कि जो अज़ाब भी आए वो शहर पर आए



बताओ दाम गुरु चाहिए तुम्हें अब क्या

परिंदगान-ए-हवा ख़ाक पर उतर आए



अजब ख़ुलूस से रुख़्सत किया गया हम को

ख़याल-ए-ख़ाम का तावान था सो भर आए


 

 

 

 

 

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