| हवास में तो न थे फिर भी क्या न कर आए | |
| कि दार पर गए हम और फिर उतर आए | |
| अजीब हाल के मजनूँ थे जो ब-इश्वा-ओ-नाज़ | |
| ब-सू-ए-बाद ये महमिल में बैठ कर आए | |
| कभी गए थे मियाँ जो ख़बर के सहरा की | |
| वो आए भी तो बगूलों के साथ घर आए | |
| कोई जुनूँ नहीं सौदाइयान-ए-सहरा को | |
| कि जो अज़ाब भी आए वो शहर पर आए | |
| बताओ दाम गुरु चाहिए तुम्हें अब क्या | |
| परिंदगान-ए-हवा ख़ाक पर उतर आए | |
| अजब ख़ुलूस से रुख़्सत किया गया हम को | |
| ख़याल-ए-ख़ाम का तावान था सो भर आए | |
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