ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उन के - जौन एलिया

 

 

 




ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उन के

ग़म तो जाने थे राएगाँ उन के



मस्त उन को गुमाँ में रहने दे

ख़ाना-बर्बाद हैं गुमाँ उन के



यार सुख नींद हो नसीब उन को

दुख ये है दुख हैं बे-अमाँ उन के



कितनी सरसब्ज़ थी ज़मीं उन की

कितने नीले थे आसमाँ उन के



नौहा-ख़्वानी है क्या ज़रूर उन्हें

उन के नग़्मे हैं नौहा-ख़्वाँ उन के


 

 

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