| एक गुमाँ का हाल है और फ़क़त गुमाँ में है | |
| किस ने अज़ाब-ए-जाँ सहा कौन अज़ाब-ए-जाँ में है | |
| लम्हा-ब-लम्हा दम-ब-दम आन-ब-आन रम-ब-रम | |
| मैं भी गुज़िश्तगाँ में हूँ तू भी गुज़िश्तगाँ में है | |
| आदम-ओ-ज़ात-ए-किब्रिया कर्ब में हैं जुदा जुदा | |
| क्या कहूँ उन का माजरा जो भी है इम्तिहाँ में है | |
| शाख़ से उड़ गया परिंद है दिल-ए-शाम-ए-दर्द-मंद | |
| सहन में है मलाल सा हुज़्न सा आसमाँ में है | |
| ख़ुद में भी बे-अमाँ हूँ मैं तुझ में भी बे-अमाँ हूँ मैं | |
| कौन सहेगा उस का ग़म वो जो मिरी अमाँ में है | |
| कैसा हिसाब क्या हिसाब हालत-ए-हाल है अज़ाब | |
| ज़ख़्म नफ़स नफ़स में है ज़हर ज़माँ ज़माँ में है | |
| उस का फ़िराक़ भी ज़ियाँ उस का विसाल भी ज़ियाँ | |
| एक अजीब कश्मकश हल्क़ा-ए-बे-दिलाँ में है | |
| बूद-ओ-नबूद का हिसाब मैं नहीं जानता मगर | |
| सारे वजूद की नहीं मेरे अदम की हाँ में है | |
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