दिल जो इक जाए थी दुनिया हुई आबाद उस में - जौन एलिया

 

 




दिल जो इक जाए थी दुनिया हुई आबाद उस में

पहले सुनते हैं कि रहती थी कोई याद उस में



वो जो था अपना गुमान आज बहुत याद आया

थी अजब राहत-ए-आज़ादी-ए-ईजाद उस में



एक ही तो वो मुहिम थी जिसे सर करना था

मुझे हासिल न किसी की हुई इमदाद उस में



एक ख़ुश्बू में रही मुझ को तलाश-ए-ख़द-ओ-ख़ाल

रंग फ़सलें मिरी यारो हुईं बरबाद उस में



बाग़-ए-जाँ से तू कभी रात गए गुज़रा है

कहते हैं रात में खेलें हैं परी-ज़ाद उस में



दिल-मोहल्ले में अजब एक क़फ़स था यारो

सैद को छोड़ के रहने लगा सय्याद उस में


 

 

 

 

 

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