| कब उस का विसाल चाहिए था | |
| बस एक ख़याल चाहिए था | |
| कब दिल को जवाब से ग़रज़ थी | |
| होंटों को सवाल चाहिए था | |
| शौक़ एक नफ़स था और वफ़ा को | |
| पास-ए-मह-ओ-साल चाहिए था | |
| इक चेहरा-ए-सादा था जो हम को | |
| बे-मिस्ल-ओ-मिसाल चाहिए था | |
| इक कर्ब में ज़ात-ओ-ज़िंदगी हैं | |
| मुमकिन को मुहाल चाहिए था | |
| मैं क्या हूँ बस इक मलाल-ए-माज़ी | |
| इस शख़्स को हाल चाहिए था | |
| हम तुम जो बिछड़ गए हैं हम को | |
| कुछ दिन तो मलाल चाहिए था | |
| वो जिस्म जमाल था सरापा | |
| और मुझ को जमाल चाहिए था | |
| वो शोख़ रमीदा मुझ को अपनी | |
| बाँहों में निढाल चाहिए था | |
| था वो जो कमाल-ए-शौक़-ए-वसलत | |
| ख़्वाहिश को ज़वाल चाहिए था | |
| जो लम्हा-ब-लम्हा मिल रहा है | |
| वो साल-ब-साल चाहिए था | |
0 Comments