| कू-ए-जानाँ में और क्या माँगो | |
| हालत-ए-हाल यक सदा माँगो | |
| हर-नफ़स तुम यक़ीन-ए-मुनइम से | |
| रिज़्क़ अपने गुमान का माँगो | |
| है अगर वो बहुत ही दिल नज़दीक | |
| उस से दूरी का सिलसिला माँगो | |
| दर-ए-मतलब है क्या तलब-अंगेज़ | |
| कुछ नहीं वाँ सो कुछ भी जा माँगो | |
| गोशा-गीर-ए-ग़ुबार-ए-ज़ात हूँ में | |
| मुझ में हो कर मिरा पता माँगो | |
| मुनकिरान-ए-ख़ुदा-ए-बख़शिंदा | |
| उस से तो और इक ख़ुदा माँगो | |
| उस शिकम-रक़्स-गर के साइल हो | |
| नाफ़-प्याले की तुम अता माँगो | |
| लाख जंजाल माँगने में हैं | |
| कुछ न माँगो फ़क़त दुआ माँगो | |
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