बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगे - जौन एलिया

 

 

 




बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगे

सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे



रक़्स है रंग पर रंग हम-रक़्स हैं

सब बिछड़ जाएँगे सब बिखर जाएँगे



ये ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता

सुब्ह होते ही सब काम पर जाएँगे



कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं

क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे



है ग़नीमत कि असरार-ए-हस्ती से हम

बे-ख़बर आए हैं बे-ख़बर जाएँगे


 

 

 

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