| ख़ून थूकेगी ज़िंदगी कब तक | |
| याद आएगी अब तिरी कब तक | |
| जाने वालों से पूछना ये सबा | |
| रहे आबाद दिल-गली कब तक | |
| हो कभी तो शराब-ए-वस्ल नसीब | |
| पिए जाऊँ मैं ख़ून ही कब तक | |
| दिल ने जो उम्र-भर कमाई है | |
| वो दुखन दिल से जाएगी कब तक | |
| जिस में था सोज़-ए-आरज़ू उस का | |
| शब-ए-ग़म वो हवा चली कब तक | |
| बनी-आदम की ज़िंदगी है अज़ाब | |
| ये ख़ुदा को रुलाएगी कब तक | |
| हादिसा ज़िंदगी है आदम की | |
| साथ देगी भला ख़ुशी कब तक | |
| है जहन्नुम जो याद अब उस की | |
| वो बहिश्त-ए-वजूद थी कब तक | |
| वो सबा उस के बिन जो आई थी | |
| वो उसे पूछती रही कब तक | |
| मीर-'जौनी' ज़रा बताएँ तो | |
| ख़ुद में ठहरेंगे आप ही कब तक | |
| हाल-ए-सहन-ए-वजूद ठहरेगा | |
| तेरा हंगाम-ए-रुख़्सती कब तक | |
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