वो क्या कुछ न करने वाले थे - जौन एलिया

 

 

 




वो क्या कुछ न करने वाले थे

बस कोई दम में मरने वाले थे



थे गिले और गर्द-ए-बाद की शाम

और हम सब बिखरने वाले थे



वो जो आता तो उस की ख़ुश्बू में

आज हम रंग भरने वाले थे



सिर्फ़ अफ़्सोस है ये तंज़ नहीं

तुम न सँवरे सँवरने वाले थे



यूँ तो मरना है एक बार मगर

हम कई बार मरने वाले थे


 

 

 

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