मैं न ठहरूँ न जान तू ठहरे - जौन एलिया

 

 




मैं न ठहरूँ न जान तू ठहरे

कौन लम्हों के रू-ब-रू ठहरे



न गुज़रने पे ज़िंदगी गुज़री

न ठहरने पे चार-सू ठहरे



है मिरी बज़्म-ए-बे-दिली भी अजीब

दिल पे रक्खूँ जहाँ सुबू ठहरे



मैं यहाँ मुद्दतों में आया हूँ

एक हंगामा कू-ब-कू ठहरे



महफ़िल-ए-रुख़्सत-ए-हमेशा है

आओ इक हश्र-ए-हा-ओ-हू ठहरे



इक तवज्जोह अजब है सम्तों में

कि न बोलूँ तो गुफ़्तुगू ठहरे



कज-अदा थी बहुत उमीद मगर

हम भी 'जौन' एक हीला-जू ठहरे



एक चाक-ए-बरहंगी है वजूद

पैरहन हो तो बे-रफ़ू ठहरे



मैं जो हूँ क्या नहीं हूँ मैं ख़ुद भी

ख़ुद से बात आज दू-बदू ठहरे



बाग़-ए-जाँ से मिला न कोई समर

'जौन' हम तो नुमू नुमू ठहरे


 

 

 

 

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