| मैं तुम्हारे लिए, जि़न्दगी भर दहा |
| तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो |
| मैं तुम्हारे लिए, उम्र भर तक चला |
| तुम भी मेरे लिए सात पग तो चलो |
| दीपकों की तरह रोज़ जब मैं जला |
| तब तुम्हारे भवन में दिवाली हुई |
| जगमगाता, तुम्हारे लिए रथ बना |
| किन्तु मेरी हर एक रात काली हुई |
| मैंने तुमको नयन-नीर सागर दिया |
| तुम भी मेरे लिए अंजुरी भर तो दो |
| मैं तुम्हारे लिए जि़न्दगी भर दहा |
| तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो |
<< Prev Home Poetry List Next >>
0 Comments