| मन
तुम्हारा ! |
| हो गया |
| तो हो
गया .... |
|
| एक तुम
थे |
| जो सदा
से अर्चना के गीत थे, |
| एक हम
थे |
| जो सदा
से धार के विपरीत थे |
| ग्राम्य-स्वर |
| कैसे
कठिन आलाप नियमित साध पाता, |
| द्वार
पर संकल्प के |
| लखकर
पराजय कंपकंपाता |
| क्षीण
सा स्वर |
| खो गया
तो, खो गया |
| मन
तुम्हारा ! |
| हो गया |
| तो हो
गया......... |
|
| लाख
नाचे |
| मोर सा
मन लाख तन का सीप तरसे, |
| कौन
जाने |
| किस
घड़ी तपती धरा पर मेघ बरसे, |
| अनसुने
चाहे रहे |
| तन के
सजग शहरी बुलावे, |
| प्राण
में उतरे मगर |
| जब
सृष्टि के आदिम छलावे |
| बीज
बादल |
| बो गया
तो, बो गया, |
| मन
तुम्हारा! |
| हो गया |
| तो हो
गया....... |
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