| सूरज पर प्रतिबंध अनेकों |
| और भरोसा रातों पर |
| नयन हमारे सीख रहे हैं |
| हँसना झूठी बातों पर |
| हमने जीवन की चौसर पर |
| दाँव लगाए आँसू वाले |
| कुछ लोगों ने हर पल, हर दिन |
| मौके देखे बदले पाले |
| हम शंकित सच पा अपने, |
| वे मुग्ध स्वयं की घातों पर |
| नयन हमारे सीख रहे हैं |
| हँसना झूठी बातों पर |
| हम तक आकर लौट गई हैं |
| मौसम की बेशर्म कृपाएँ |
| हमने सेहरे के संग बाँधी |
| अपनी सब मासूम खताएँ |
| हमने कभी न रखा स्वयं को |
| अवसर के अनुपातों पर |
| नयन हमारे सीख रहे हैं |
| हँसना झूठी बातों पर |
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