| तूफ़ानी लहरें हों |
| अम्बर के पहरे हों |
| पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों |
| सागर के माँझी मत मन को तू हारना |
| जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है |
| पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है |
| राजवंश रूठे तो |
| राजमुकुट टूटे तो |
| सीतापति-राघव से राजमहल छूटे तो |
| आशा मत हार, पार सागर के एक बार |
| पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है |
| पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है |
| घर भर चाहे छोड़े |
| सूरज भी मुँह मोड़े |
| विदुर रहे मौन, छिने राज्य, स्वर्णरथ, घोड़े |
| माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे |
| पंचतत्व सौ पर है भारी, बतलाना है |
| जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है |
| पतझर का मतलब है, फिर बसंत आना है |
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