| खुद से बहुत मैं दूर था, बेशक ज़माना पास था |
| जीवन में जब तुम थे नहीं, पल भर नहीं उल्लास था |
| खुद से बहुत मैं दूर था, बेशक ज़माना पास था |
| होठों पे मरुथल और दिल में एक मीठी झील थी |
| आँखों में आँसू से सजी, इक दर्द की कन्दील थी |
| लेकिन मिलोगे तुम मुझे |
| मुझको अटल विश्वास था |
| खुद से बहुत मैं दूर था, बेशक ज़माना पास था |
| तुम मिले जैसे कुँवारी कामना को वर मिला |
| चाँद की आवारगी को पूनमी-अम्बर मिला |
| तन की तपन में जल गया |
| जो दर्द का इतिहास था |
| खुद से बहुत मैं दूर था, बेशक ज़माना पास था। |
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