प्रतिष्ठा वर्मा की रचनाएँ || Poetry of Pratishtha Verma


प्रतिष्ठा वर्मा की रचनाएँ || Poetry of Pratishtha Verma

कटाक्ष दो टूक की बाते

सुना है कैंडल मार्च की बात चल रही
लगता है फिर से कोई सनसनी छाई है ।
शायद एक बेटी फिर से कहराई है ,
फिर से किसी मासूम की चीखें गूंजी है ,
लगता है फिर से कोई सनसनी छाई है ।

नारी की ही कोख से जन्में हो तुम ,
उस माँ का ही चीर हरण करके आए हो ।
शौख बड़ा मर्दानगी का रखकर ,
क्या करते हो उसे बलात्कार करके ।

पर इन सब से तुम्हें क्या ...
माहौल संगीन थोड़ी करना ,
हमारी बेटी तो सुरक्षित खड़ी है ,
अभी तो वोटों की बारी है ,
विधानसभा की तैयारी बाकी है ,
हमारी बेटी तो अभी सुरक्षित खड़ी है ।

क्या नारी आज मैं तुमसे पूछती हूँ ...?
रोज निर्भया, ट्विंकल, गीता जलेगी
क्या तुम्हारा यही अस्तित्व रह गया है ...

छोड़कर इन्हें अदालत की दहलीज पर,
लग जाएंगे इन पापियों के पाँच –दस साल,
क्यों न करके खुद इनका संघार 
नारी तुम अपनी मिशाल बनाओ ।।*2

©प्रतिष्ठा वर्मा

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